ऊष्मा की परिभाषा, प्रकार, चालन, संवहन, विकिरण, संचरण की विधियां

ऊष्मा की परिभाषा || ऊष्मा के प्रकार || ऊष्मा संचरण की विधियां || ऊष्मा विकिरण || ऊष्मा का संवहन || ऊष्मा का चालन

ऊष्मा की परिभाषा :- 

उष्मा वह एनर्जी (उर्जा ) है । जो एक वस्तु से दूसरे वस्तु में टेंप्रेचर डिफरेंट ( तापांतर ) के कारण उत्पन्न होती है । 

  • उष्मा ( हिट ) सदैव ऊंचे ताप वाली वस्तु से नीचे ताप वाली वस्तु में प्रवाहित होती है। 
  • उष्मा का स्थानातरण तब तक होता रहता है। जब तक दोनों वास्तु का ताप सामान ना हो जाये।
ऊष्मा की परिभाषा

उष्मा का मात्रक :-  कैलोरी, किलोकैलोरी, जूल  

उष्मा की परिभाषा के उदाहरण :-

 लोहे ( Iron rod) का एक क्षण ले इसका एक सिरा जलती हुई मोमबत्ती के संपर्क (contact) में लाये। लोहे का पहला सिरा मोमबत्ती के संपर्क में लाने पर यह गर्म होने लगता है। कुछ देर तक लोहे की छड मोमबत्ती के संपर्क में रहने पर इसका दूसरा सिरा गर्म होने लगता है।

निष्कर्ष – 
इससे यह निष्कर्ष निकालता है। की जब लोहे की छड को गरम किया जाता है। तो मोमबती के लौ (Flam) के निकट  लोहे के अणु (Molecule) सबसे पहले गरम होते है। फिर सबसे गर्म अणु के पास के अणु गर्म होने लगते है। इस प्रकार ऊष्मा लोहे की छड के एक सिरे से दुसरे सिरे तक पहुच जाता है। ऊष्मा की परिभाषा – इससे यह सिद्ध होता है की ऊष्मा उच्च ताप से निम्न ताप की ओर बहती है।जैसा चल चित्र में दिख रहा है

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ऊष्मा के प्रकार

उष्मा के निम्न प्रकार है। 

  1. विशिष्ट ऊष्मा 

यदि m द्रव्यमान कि किसी वस्तु को क्षमा Q देने पर वस्तु के ताप में △ t की वृद्धि होती है तो विशिष्ट ऊष्मा   Q s = ————— m✗🛆t    

  •  जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है ।
  • जल की विशिष्ट ऊष्मा का मान 
  1. एक कैलोरी / ग्राम ०C 
  2.  1 किलो कैलोरी / ग्राम ०C  
  3.  4.2 メ 103 जूल / ग्राम ०C  

विशिष्ट ऊष्मा धारिता दो प्रकार की होती हैं।

नियत आयत पर विशिष्ट ऊष्मा धारिता –  इनमें एम द्रव्यमान के लिए गए गैस का आयतन नियत रहता है। Sb से निरूपित करते हैं। नियत दांव पर विशिष्ट ऊष्मा धारिता –  इनमें एम द्रव्यमान के लिए गए गैस का दाब नियत है इसे sp से निरूपित करते हैं।

गुप्त ऊष्मा-

  ऊष्मा (Heat) की वह मात्रा जो पदार्थ के 1 ग्राम के स्थिरता ताप (temprature) पर अवस्था परिवर्तन में व्यय होती है। उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा कहलाती है। इसे L से प्रदर्शित किया जाता है इसके मात्रक कैलोरी प्रति ग्राम जूल प्रति ग्राम जूल प्रति किग्रा होते हैं।    

ऊष्मा संचरण की विधियां :-

उष्मा संचरण की निम्न तीन विधिय है। 

  • ऊष्मा का चालन

यह ऊष्मा संचरण की वह विधि है। जिसमे जब ठोस (Solid) को गरम किया जाता है। तो ठोस में उपस्थित अणु ( Molecule ) बिना अपना स्थान छोड़े ऊष्मा को दुसरे अणु को को स्थानांतरित कर देता है ।अथार्त ऊष्मा उच्च ताप से निम्न ताप की ओर बहती है। यह ऊष्मा का स्थानांतर ऊष्मा का चालन  कहलाता है। 

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जैसा इस चित्र में धातु के अणु बिना स्थानांतरित हुए ऊष्मा को एक अणु से दुसरे अणु तक पहुचाते है। 

  • ऊष्मा का संवहन

यह ऊष्मा संवहन की वह विधि है। जिसमे किसी तरल या गैस को गरम किया जाता है। तो तरल के अणु ऊष्मा पाकर अपना स्थान छोड़ देते है। और ठण्डे अणु उनका स्थान लेते है। ऊष्मा के स्थानांतरण की यह क्रिया ऊष्मा का संवहन कहलाता है। 

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इस विकर में रखे द्रव को जब गरम किया जाता तब विकर का निचला हिस्सा सबसे पहले गरम होता जो तली के सबसे नजदीकिय द्रव के अणु को गरम कर देता है। अब ये अणु गरम होने के बाद ऊपर की तरफ चले जाते है ।और उनके स्थान पर ठण्डे नए अणु आ जाते है। फिर वे ऊष्मा पाकर अपना स्थान छोड़ देते है यह क्रिया चलती रहती है। 

  • ऊष्मा विकिरण

ऊष्मा संचरण की वह विधि जिनको स्थानांतर के लिए माध्यम की आवस्यकता नहीं होती जैसे की ऊष्मा विकिरण द्वारा पृथ्वी पर आती है ।

  जैसा इस चित्र में दिखाया गया है की कैसे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर विकिरण द्वारा आता है।    

ऊष्मा की परिभाषा || ऊष्मा के प्रकार || ऊष्मा संचरण की विधियां || ऊष्मा विकिरण || ऊष्मा का संवहन || ऊष्मा का चालन

ऊष्मा की परिभाषा :- 

उष्मा वह एनर्जी (उर्जा ) है  जो एक वस्तु से दूसरे वस्तु में टेंप्रेचर डिफरेंट ( तापांतर ) के कारण उत्पन्न होती है   
 
  • उष्मा ( हिट ) सदैव ऊंचे ताप वाली वस्तु से नीचे ताप वाली वस्तु में प्रवाहित होती है 
  • उष्मा का स्थानातरण तब तक होता रहता है। जब तक दोनों वास्तु का ताप सामान ना हो जाये
ऊष्मा की परिभाषा

 

उष्मा का मात्रक :-  कैलोरी, किलोकैलोरी, जूल  

उष्मा की परिभाषा के उदाहरण :-

 

 लोहे ( Iron rod) का एक क्षण ले इसका एक सिरा जलती हुई मोमबत्ती के संपर्क (contact) में लाये लोहे का पहला सिरा मोमबत्ती के संपर्क में लाने पर यह गर्म होने लगता है कुछ देर तक लोहे की छड मोमबत्ती के संपर्क में रहने पर इसका दूसरा सिरा गर्म होने लगता है

निष्कर्ष – 
इससे यह निष्कर्ष निकालता है की जब लोहे की छड को गरम किया जाता है तो मोमबती के लौ (Flam) के निकट  लोहे के अणु (Molecule) सबसे पहले गरम होते है फिर सबसे गर्म अणु के पास के अणु गर्म होने लगते है इस प्रकार ऊष्मा लोहे की छड के एक सिरे से दुसरे सिरे तक पहुच जाता है ऊष्मा की परिभाषा – इससे यह सिद्ध होता है की ऊष्मा उच्च ताप से निम्न ताप की ओर बहती है जैसा चल चित्र में दिख रहा है

ऊष्मा के प्रकार

उष्मा के निम्न प्रकार है 
  1. विशिष्ट ऊष्मा 

यदि m द्रव्यमान कि किसी वस्तु को क्षमा Q देने पर वस्तु के ताप में △ t की वृद्धि होती है तो विशिष्ट ऊष्मा

 

Q

s = —————

m✗🛆t

 
 

  •  जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है ।
  • जल की विशिष्ट ऊष्मा का मान 
    1. एक कैलोरी / ग्राम ०C 
    2.  1 किलो कैलोरी / ग्राम ०C  
    3.  4.2 メ 103 जूल / ग्राम ०C  

विशिष्ट ऊष्मा धारिता दो प्रकार की होती हैं

 

नियत आयत पर विशिष्ट ऊष्मा धारिता –  इनमें एम द्रव्यमान के लिए गए गैस का आयतन नियत रहता है Sb से निरूपित करते हैं

नियत दांव पर विशिष्ट ऊष्मा धारिता –  इनमें एम द्रव्यमान के लिए गए गैस का दाब नियत है इसे sp से निरूपित करते हैं

गुप्त ऊष्मा-

 

ऊष्मा (Heat) की वह मात्रा जो पदार्थ के 1 ग्राम के स्थिरता ताप (temprature) पर अवस्था परिवर्तन में व्यय होती है उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा कहलाती है इसे L से प्रदर्शित किया जाता है इसके मात्रक कैलोरी प्रति ग्राम जूल प्रति ग्राम जूल प्रति किग्रा होते हैं  

 

ऊष्मा संचरण की विधियां :-

उष्मा संचरण की निम्न तीन विधिय है 
  • ऊष्मा का चालन
यह ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमे जब ठोस (Solid) को गरम किया जाता है तो ठोस में उपस्थित अणु ( Molecule ) बिना अपना स्थान छोड़े ऊष्मा को दुसरे अणु को को स्थानांतरित कर देता है अथार्त ऊष्मा उच्च ताप से निम्न ताप की ओर बहती है यह ऊष्मा का स्थानांतर ऊष्मा का चालन  कहलाता है 

 


जैसा इस चित्र में धातु के अणु बिना स्थानांतरित हुए ऊष्मा को एक अणु से दुसरे अणु तक पहुचाते है 

 
  • ऊष्मा का संवहन
यह ऊष्मा संवहन की वह विधि है जिसमे किसी तरल या गैस को गरम किया जाता है तो तरल के अणु ऊष्मा पाकर अपना स्थान छोड़ देते है और ठण्डे अणु उनका स्थान लेते है ऊष्मा के स्थानांतरण की यह क्रिया ऊष्मा का संवहन कहलाता है 

इस विकर में रखे द्रव को जब गरम किया जाता तब विकर का निचला हिस्सा सबसे पहले गरम होता जो तली के सबसे नजदीकिय द्रव के अणु को गरम कर देता है अब ये अणु गरम होने के बाद ऊपर की तरफ चले जाते है और उनके स्थान पर ठण्डे नए अणु आ जाते है फिर वे ऊष्मा पाकर अपना स्थान छोड़ देते है यह क्रिया चलती रहती है 
  • ऊष्मा विकिरण
ऊष्मा संचरण की वह विधि जिनको स्थानांतर के लिए माध्यम की आवस्यकता नहीं होती जैसे की ऊष्मा विकिरण द्वारा पृथ्वी पर आती है 

 
जैसा इस चित्र में दिखाया गया है की कैसे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर विकिरण द्वारा आता है
 
 
 
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