कार्य की परिभाषा, सूत्र, मात्रक एवं महत्वपूर्ण प्रतियोगी प्रशन्न

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कार्य की परिभाषा

कार्य की परिभाषा

किसी वस्तु पर किया गया कार्य वस्तु पर लगाए गए बल तथा बल की दिशा में उत्पन्न विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। 

कार्य का सूत्र

कार्य का सूत्र = बल× बल की दिशा में विस्थापन

\mathbf{W= F.s}
  •  यदि बल ( F)  विस्थापन की दिशा में न लगकर ∅ कोण  लगता है तो इस दशा में कार्य  
\mathbf{W= F.s.Cos∅}
  • यदि बल ( F ) विस्थापन की दिशा में न लगकर 90 अंश पर लगता है तो इस दशा में W = 0 क्योंकि इस दशा में cos90 का मान शून्य होगा|
\mathbf{W= 0}
  • यदि बल ( F)  विस्थापन ( s)  की दिशा में लगे तो इस दशा में cos0 का मान 1 होगा 
\mathbf{W= F.s}
  • जब विस्थापन बल की विपरीत दिशा में होता है तब ∅ = 180  या cos180 = -1,  W = -F. s इस स्थिति में यह ऋणत्मक होगा 
\mathbf{W= -F.s}

 मात्रक 

यह एक अदिश राशि है जिसके मात्रक निम्न है

  1. MKS पद्धति में न्यूटन-मीटर अथवा जूल होता है
  2. CGS पद्धति में डाइन सेंटीमीटर या आर्ग होता है

1 जूल = 107 आर्ग  

संपूरक कोण पतंगाकार चतुर्भुज
आयत न्यून कोण
वृहत कोण पूरक कोण
अधिक कोण ऋजु कोण

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