15 महत्वपूर्ण संख्या (Sankhya) प्रकृति, पूर्ण, पूर्णांक, सम, विषम, अभाज्य, भाज्य, परिमेय, अपरिमेय, वास्तविक संख्या

15 महत्वपूर्ण संख्या (Sankhya) प्रकृति, पूर्ण, पूर्णांक, सम, विषम, अभाज्य, भाज्य, परिमेय, अपरिमेय, वास्तविक संख्या

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संख्या (Sankhya) 

संख्या ( Sankhya ) ऐसी पद्धति है। जिसका प्रयोग वस्तुओ की गणना, माप, आदि मे प्रयोग किया जाता है। संख्याओं को उनके गुण के आधार पर निम्न भागो मे बाटा गया है।

प्रकृति संख्या (Prakritik Sankhya)

प्राकृतिक वस्तुओ या किसी अन्य किसी वस्तुओ को गिनने (Counting) करने के लिए जिन संख्याओं का प्रयोग किया जाता है। उन्हे प्राकृतिक संख्या कहते है।    प्राकृतिक संख्याओं का मान 1 से अनंत तक होता है। 

प्रकृति संख्या का मान

शून्य (0) संख्या प्राकृतिक संख्या नही है। क्योकि शून्य से किसी वस्तु की गणना नही किया जा सकता है।   

पूर्ण संख्या ( Purn Sankhya )

यदि प्राकृतिक संख्या ( Natural Numbers) मे शून्य को भी सामिल कर लिया जाए तो उन संख्याओं को पूर्ण संख्या कहते है।    पूर्ण संख्या का मान शून्य से अनंत तक होता है। 

पूर्ण संख्या का मान

Note – सभी प्राकृतिक संख्याएं पूर्ण संख्या होती हैं लेकिन सभी पूर्ण संख्याएं प्राकृतिक संख्या नहीं होती।

पूर्णांक संख्या (Purnank Sankhya)

यदि पूर्ण संख्याओं मे ऋणात्मक को सामिल कर लिया जाए तो पूर्णांक संख्या कहते है।    ऋणात्मक,  शून्य और धनात्मक संख्या या संख्याओं के समूह को पूर्णांक संख्या कहते है। 

पूर्णांक संख्या, Purnank Sankhya

सम संख्या (Sam Sankhya) 

वे संख्याएँ जिनका इकाई अंक 0, 2, 4, 6, 8 हो वे संख्याएँ सम संख्या कहलाते है।    वे संख्याएँ जो दो से पूर्ण रूप से विभाजित हो जाए सम संख्याएँ कहलाते है।    0, 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16 ……. अनंत

  • 0 एक पूर्ण सम संख्या है जो दो से विभाजित हो जाती है। 0/2 = 0
  • दो सम संख्याओं का योगफल सम संख्या होता है।
  • दो सम संख्याओं का गुणनफल सम संख्या होता है।

विषम संख्या ( Visham Sankhya)  

वे संख्याएँ जिनका इकाई अंक 1, 3, 5, 7, 9 हो वे संख्या विषम संख्या कहलाता है।    दो से अभाज्य संख्याएँ विषम संख्याएँ कहलाती है।    1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17 ……. अनंत

  • दो विषम संख्याओं का योगफल सदैव सम संख्या होता है।
  • दो विषम संख्याओं का गुणनफल सदैव विषम संख्या होता है।

अभाज्य संख्या ( Abhajya Sankhya)

वे संख्याएँ या संख्याओं का समूह जो 1 और स्वम् के अतिरिक्त किसी अन्य संख्याओं से विभाजित नही होती हैं। अभाज्य संख्या कहलाती है।    उदाहरण – 11, 13, 17 , 23 …. 

  • 2 एक अभाज्य संख्या है।

भाज्य संख्या (Bhajya Sankhya)

वह संख्या जो एक स्वय और अन्य संख्याओं से विभाजित जो जाता है। भाज्य संख्या कहलाती है।    उदाहरण – 1. चारएक अभाज्य संख्या है। जो विभाजित  जाता है।    2. क्या 9 एक अभाज्य संख्या है। हाँ  क्योकि 9 स्वय के अतिरिक्त किसी और से विभाजित हो जाती है।

भाज्य संख्याएँ  2, 4, 6, 8, 10, 12, 14 …….. आदि

परिमेय संख्या 

वह संख्या जो p/q, a/b, c/d के रूप में व्यक्त की जा सकती है। परिमेय संख्या कहलाती है। लेकिन जिन संख्याओ का हर शुन्य होता है। वे परिमेय संख्या नहीं होती है।   

उदहारण – 4, 3/8, 5/8 आदि।

परिमेय संख्याओ को कई रूप में बाटा गया है।

समतुल्य परिमेय संख्या 

वे धनात्मक और ऋणात्मक परिमेय संख्याए जिनका मान समान होता है। समतुल्य परिमेय संख्याओ को दो में बाटा गया है।

धनात्मक परिमेय 

वे परिमेय संख्याएँ जिनका मान धनात्मक होता है।  धनात्मक परिमेय होते है।    जैसे – 1/2, 2/3, 4/5, 10/13 आदि धनात्मक परिमेय है।   

ऋणात्मक परिमेय 

परिमेय संख्याएँ जिनका मान ऋणात्मक होता है। ऋणात्मक परिमेय होता है।    जैसे – (-1/2, -2/3, -4/5, -10/13) आदि ऋणात्मक परिमेय है। 

धनात्मक समतुल्य परिमेय 

वे परिमेय संख्या जिनका  मान समान होता है। धनात्मक परिमेय संख्या होती है।

जैसे – 1/2 और 2/4 दोनों धनात्मक समतुल्य परिमेय संख्या है। क्योकि दोनों परिमेय संख्याओ का मान समान होता है।
1/2 = 0.5 
2/4 = 1/2 = 0.5 

4/5 और 8/10, 3/7 और 6/14, 8/9 और 16/18 आदि समतुल्य धनात्मक परिमेय है।

ऋणात्मक समतुल्य परिमेय 

वे ऋणात्मक परिमेय संख्या जिनका मान समान होता है।  ऋणात्मक परिमेय है।    जैसे —   -4/5  और -8/10, -3/7 और -6/14, -8/9 और -16 / 18

चलिए शून्य और एक के बिच परिमेय संख्याओ को दर्शाते है।शून्य और एक के मध्य भागो को आठ भागो में बाटते है। जैसा की निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है। शून्य और एक के बिच 1/8, 2/8, 3/8, 4/8, 5/8, 6/8, 7/8, 1

अपरिमेय संख्या

वह संख्या जिन्हें भिन्नों में या p/q में  व्यक्त नहीं किया जा सकता है वह संख्या अपरिमेय संख्या होगी।   जैसे –  √x, √y, √w, √p, √t, √3, √6, आदि संख्याओं को भिन्नों में नहीं बदला जा सकता। अतः  यह संख्याएं अपरिमेय संख्याएं होंगी।

वास्तविक संख्या

वह संख्या या संख्याओं का समूह जिन्हें ना तो परिमेय संख्याओं में न ही अपरिमेय संख्याओं में व्यक्त किया जा सकता है। वे संख्याएं वास्तविक संख्याएं कहलाती है।     जैसे –  8, 6, 2 + √3 आदि   महत्वपूर्ण प्रशन –

  1. सबसे छोटी अभाज्य संख्या कौन है? = 2
  2. सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या है ? = 1
  3. सबसे छोटी पूर्ण संख्या है ? = 0
  4. सबसे छोटी सम अभाज्य संख्या है? = 2
  5. सबसे छोटी विषम अभाज्य संख्या है? = 3
  6. सबसे छोटी भाज्य संख्या है? = 4

सबसे छोटी व बड़ी धनात्मक पूर्ण और पूर्णांक संख्या

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