संयोजकता क्या है?

संयोजकता क्या है? संयोजकता के प्रकार (वैधुत, सह, उप सहसंयोजकता)

संयोजकता क्या है?

किसी तत्व के बाहरी कक्ष में पाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या को संयोजकता कहते हैं।

संयोजकता शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रैंकलैंड ने किया था। संयोजकता शब्द की उत्पत्ति वैलेंटाइन से हुई है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है क्षमता।

तत्वों के एक दूसरे से जोड़ने की क्षमता को संयोजकता कहा जाता है। वह तत्व जो दूसरे तत्वों से नहीं जुड़ पाते उनकी संयोजकता 0 होती है।

Ex- He, Ne, Ar, Kr, Xe और Rn इन तत्वों की संयोजकता 0 होती है।

संयोजकता शब्द का प्रयोग निम्न दो बातों के लिए किया जा सकता है।

  • तत्वों की संयोजक क्षमता को एक पूर्ण संख्या में व्यक्त करने के लिए।
  • उन बलों के लिए जो अणु में परमाणु को एक दूसरे से बांधे रहते हैं।

संयोजकता की पुरानी अवधारणा

इस अवधारणा के अनुसार किसी यौगिक में जितने हाइड्रोजन पाए जाएंगे वही उसकी संयोजकता होगी। अर्थात यह कह सकते है की जिस तत्व में जितने हाइड्रोजन होंगे उतनी ही उस तत्वा की सयोजकता होगी।

Ex- NH3- 3, PH3 – 3, H2O – 2, CH4 – 4

यह अवधारणा इसलिए गलत साबित हुई कि इस अवधारणा के अनुसार उन यौगिकों की संयोजकता नहीं ज्ञात की जा सकती जिनमें हाइड्रोजन नहीं पाए जाते है।

NaCl ( नमक का सूत्र ) हाइड्रोजन नहीं है। अतः सयोजकता की पुरानी अवधारणा NaCl की सयोजकता नहीं ज्ञात की जा सकती।

संयोजकता की नई अवधारणा

इस अवधारणा के अनुसार किसी तत्व का अष्टक पूरा करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की संख्या को उस तत्व की संयोजकता कहते हैं।

Ex – NaCl में Na के बाह्य कोश 1 इलेक्ट्रान (2,8,1) तो यह अपनी बाहरी कोश पूरा करने के लिए 1 इलेक्ट्रान त्याग देगा। इसी प्रकार Cl के बाह्य कोश में 7 इलेक्ट्रान (2,8,7) अतः यह अपना कोश पूरा करने के लिए 1 इलेक्ट्रान ग्रहण करेगा। Na अष्टक पूरा करने के लये 1 इलेक्ट्रान का त्याग करेगा। Cl अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रान ग्रहण करेगा।

Note – एक संयोजकता वाले तत्व को एकल सयोजी, दो संयोजकता वाले तत्व को द्वितीय सयोजी, तीन संयोजकता वाले तत्व त्रिक सयोगी और चार संयोजकता वाले तत्व को चतुर्थ सयोगी तत्व कहते हैं।

संयोजकता के प्रकार

संयोजकता के प्रकार इसे 3 भागो में बाटा गया है।

विद्युत संयोजी बंध (Electro Valency)

दो परमाणु बीच इलेक्ट्रॉनिक के स्थानांतरण के द्वारा बने बंध को विधुत सयोजी बंध कहा जाता है। ये बंध जिसमे पाया जाता है उसे बैधुत सयोजी कहते है।

Ex- NaCl में वैधुत सयोजी बंध पाया जाता है। Na (सोडियम) अपना बाह्य कोश पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रान का त्याग करता है। Cl के बाहरी कोश 7 इलेक्ट्रान होते है। इसलिए अपना अष्टक (बाह्य कोश) पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रान की आवश्यकता होती है। इसलिए Cl, Na से एक इलेक्ट्रान ग्रहण करके कोश पूरा करता है। पूरा पढ़े

सहसंयोजक बंध (Co-Valency)

दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रान की साझेदारी के द्वारा बने बंध को संयोजक बंध कहते है। जिन यौगिकों में इस प्रकार के बंध पाए जाते है उन्हें संयोजक यौगिक कहते है।

Ex – Cl2, Br2 आदि

उप-सहसंयोजकता (Co-ordinate Valency)

इस प्रकार की सयोजकता में एक परमाणु इलेक्ट्रान युग्म देता है। और दूसरा इलेक्ट्रान युग्म लेता है। इलेक्ट्रान युग्म देने वाला दाता और इलेक्ट्रान युग्म लेने वाला ग्राही कहलाता है। दाता के बाह्य कोश में पुरे इलेक्ट्रान होने पर भी ग्राही से इलेक्ट्रान साँझा करता है।

Ex – NH4, SO2

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