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आवर्त सारणी का विकास,वर्गीकरण एवं वर्गीकरण का इतिहास और मेण्डलीफ की आवर्त सारणी , गुण एवं दोष।

आवर्त सारणी की आवश्यकता

प्रारम्भ में तत्वों की संख्या बहुत कम था लेकिन जैसे-जैसे तत्वों की संख्या बढ़ती गई वैसे- वैसे इनका अध्ययन करने में कठिनाइयां होने लगी इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवर्त सारणी की आवश्यकता पङी ।

आवर्त सारणी का विकास

प्रारम्भ में आवर्त सारणी में धातु और अधातु के लिए स्थान प्राप्त था लेकिन धीरे-धीरे जब गैस, अक्रिय गैस, उपधातु को आवर्त सारणी में स्थान देते हुए आवर्त सारणी का विकास किया गया ।

आवर्त वर्गीकरण

किसी मैलिक गुण को आधार बनाकर की गई पदार्थों की ऐसी व्यवस्था जिसमें निश्चित अन्तराल के बाद समान गुण वाले पदार्थों पुनः उपस्थित हो आवर्तो व्यवस्था या आवर्तो वर्गीकरण कहलाती हैं ।

तत्वों के वर्गीकरण का इतिहास

19 वी शताब्दी में तत्वों के वर्गीकरण को कई प्रयास किये गये जिसमें प्राउट की परिकल्पना, डोबरनियर का त्रिक नियम, डुमा की सममुलक श्रेणी, न्यूलैण्ड का अस्टक नियम, लोथर मेयर का परमाणु आयतन तथा परमाणु भार वक्र, मेण्डलिफ का आवर्त नियम आदि प्रमुख है ।

डोबर नियर का त्रिक नियम

डोबर नियर ने तीन-तीन तत्व का ऐसा समुह बनाया जिसके गुण परस्पर समान थे और बीच वाले तत्व का परमाणु भार किनारे वाले तत्व के परमाणु भार के औसत योग के बराबर था ।

example 👉 (1) – Li (7) , Na = 7+39/2
Na (?) = 46/2
K (39) = 23

मेण्डलीफ की आवर्त सारणी

  • सबसे पहली आवर्त सारणी मेण्डलीफ ने दिया था ।
  • जब मेण्डलीफ ने आवर्त सारणी बनाया तब 63 तत्व मौजूद थे ।
  • मेण्डलीफ ने बताया कि तत्वों की पहचान उनके परमाणु भार से की जाती हैं ।
  • जब मेण्डलीफ ने बताया कि तत्व की पहचान परमाणु भार से करते है तो यह प्रश्न उठने लगा कि उन तत्वों की पहचान कैसे की जायेगी जिनके परमाणु भार 1 से अधिक होंगे अतः समस्थानिक का गुण मेण्डलीफ की आवर्त सारणी को गलत साबित किया ।

example 👉 (1) – 1H1 ,1H2 ,1H3 (2) – 6C12,6C13,6C14 (3)- 2He3 , 2He4

  • व्युत्क्रमीत जोड़े ने भी मेण्डलीफ की आवर्त सारणी को असफल कर दिया ।
  • व्युत्क्रमीत जोड़े का मतलब यह होता है कम वाले परमाणु क्रमांक का परमाणु भार अधिक होता है और अधिक वाले परमाणु क्रमांक का परमाणु भार कम होता है ।

example 👉 (1) – 27CO59 , 28Ni58 (2)- 90Th232 , 91Pa231

  • मेंडलीफ ने अपने आवर्त सारणी में कुछ स्थान छोड़ दिया था क्योकि उनका मानना था की आगे भी तत्व की खोज होगी।
  • गैलियम की खोज ने मेंडलीफ आवर्त सारणी की सत्यता को सिद्ध किया।

मेंडलीफ के आवर्त सारणी के गुण

  • तत्वों के अध्ययन में सुविधा
  • नये तत्वों की भविष्यवाणी
  • तत्वों के यैगिक की प्रकृति की जानकारी
  • तत्वों की संयोजकता की जानकारी

मेंडलीफ के आवर्त सारणी के दोष

  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान न होना
  • आवर्त सारणी में समस्थानिक के लिए कोई स्थान न होना।
  • आवर्त सरणी में धातु एवं अधातु के बिच कोई स्पष्ट विभाजन रेखा न होना।

मोजले का प्रयोग

मोजले ने प्रयोग द्वारा यह निष्कर्ष निकलता की x – किरणे की आवृति तथा उसके परमाणु क्रमांक में निम्न सम्बन्ध है।

√v = a(z-b)

जहां v = x – किरणो की आवृत्ति , z = परमाणु क्रमांक , a,b = मोजले नियतांक

  • तत्वों की आवृत्ति (v) और परमाणु क्रमांक (z) में ग्राफ खींचने पर एक सीधी रेखा प्राप्त होती है किन्तु आवृत्ति (v) और परमाणु भार के बिच ग्राफ खिचने पर सीधी रेखा प्राप्त नहीं होती है।
  • मोजले के प्रगोग से शिध्द हुआ की परमाणु क्रमांक तत्व का मूल लक्षण है। न की परमाणु भार।

note – मेण्डलीफ ने स्कैनडियम ,गैलियम आदि के गुण उनकी खोज से पहले बता दिए थे।

जब मेंडलीफ ने अपनी आवर्त सारणी बनायीं थी तब अक्रिय गैसे का खोज नहीं हुआ था

आधुनिक आवर्त नियम

  • मोजले के प्रयोग से सिद्ध होता है की परमाणु क्रमांक तत्व का मुख्य लक्षण है परमाणु भार नहीं।
  • इस नियम के अनुसार तत्वों का गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवृत्ति फलन होते है
  • आधुनिक आवर्त नियम से समस्थानिक तथा व्युत्क्रमित जोड़े की समस्या दूर हो गई।
आवर्त श्रेणी तत्वों की संख्या परमाणु क्रमांक
1 I 2 1- 2
2 I 8 3- 10
3 III 8 11 – 18
4 III/II 18 19 – 36
5 VI/VII 18 37 -54
6 VIII/IX 32 55- 86
7 X 28 87 – 114

परमाणु त्रिज्या

किसी सह संयोजक अणु के दो परमाणु नाभिक के बिच की दुरी का आधा भाग परमाणु त्रिज्या कहलाता है।

  • किसी एक ही वर्ग में ऊपर से निचे जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है क्युकी कोश की संख्या बढ़ती है। ,R ∝n2
  • किसी एक ही आवर्त में बाये से दाये जाने पर परमाणु त्रिज्या से छोटी होती है।क्युकी परमाणु क्रमांक बढ़ता है। ,R ∝1/Z

धनात्मक की त्रिज्या

किसी परमाणु के धनायान की त्रिज्या उसके उदासीन परमाणु त्रिज्या से छोटी है।
example – Na >Na+

ऋणायन की त्रिज्या

किसी ऋणायन के त्रिज्या उसके परमाणु त्रिज्या से सदैव बड़ी होती है।
example – Cl < Cl-

वांडरवाल त्रिज्या

किसी दो समीपवर्ती अणुओ के परमाणु के नाभिक बिच के दुरी का आधा भाग वान्डरवाल त्रिज्या कहलाता है।

note – सामान्य रूप से आवर्त में बाए से दाये जाने पर हैलोजन वर्ग तक परमाणु त्रिज्या घटती है लेकिन नोबेल गैस की परमाणु त्रिज्या सबसे अधिक होती है।

विघुत ऋणात्मकता

किसी यैगिक में एक परमाणु द्वारा दूसरे परमाणु के इलेक्ट्रान को खींचने की क्षमता उस परमाणु का विघुत ऋणात्मकता कहलाता है।

  • इसके बारे में एक पालिंग ने किया था।
  • अक्रिय गैसों की विघुत ऋणात्मकता शून्य होती है।
  • किसी आवर्त में बाये से दाये जाने पर वर्ग 7 तक विघुत ऋणात्मकता बढ़ता है क्युकी परमाणु त्रिज्या घटती है।
  • किसी एक ही वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर विघुत ऋणात्मकता घटता है क्योकि परमाणु त्रिज्या बढती है ।

आयनन विभव या आयनन ऊर्जा

किसी तत्व के एक परमाणु में से एक इलेक्ट्रॉन को निकालने में जितने ऊर्जा की आवश्यकता होती है उसे आयनन विभव कहते हैं।

  • आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनन विभव बढ़ता है
  • किसी एक ही वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर आयनन विभव घटता है।
  • हाइड्रोजन का प्रथम आयनन विभव +13.6ev होता है।
  • प्रथम आयनन विभव < द्वितीय आयनन विभव< तृतीय आयनन विभव

E = -13.6ev/n2

विकर्ण संबंध

आवर्त दो के पहले तीन तत्व आवर्त तीन के उन तत्वों से गुणों में समानता प्रदर्शित करते हैं जो उनके विकर्ण सम्मुख है एक वर्ग आगे हैं

आवर्त दो

आवर्त 3

तत्वों के ऑक्साइड की प्रकृति

तत्वों के ऑक्सीजन के संयोग से बने यौगिक आक्साइड कहलाते हैं ।