वैद्युत संयोजकता किसे कहते हैं? इनके लक्षण व उदहारण

वैद्युत संयोजकता किसे कहते हैं?

‘दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रान के स्थानांतरण के द्वारा बने बंध को वैघुत संयोजी बंध कहा जाता है।
और यह बंध जिसमे पाया जाता है। उसे वैद्युत संयोजी कहा जाता है।

साधारण भाषा में वैद्युत संयोजकता किसे कहते हैं? – वैद्युत संयोजकता वाले यौगिकों में एक परमाणु इलेक्ट्रान देता है, और दूसरा ग्रहण करता है।

Ex – जैसा की निम्न चित्र में दिखाया है। NaCl में वैद्युत संयोजी बंध होता है। सोडियम के बाहरी कक्ष में एक इलेक्ट्रान की अधिकता होता है, और सोडियम को अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रान त्यागना पड़ता है। क्लोरीन के बहरी कक्ष में 7 इलेक्ट्रान होते है जिसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रान की कमी होती है इसीलिए क्लोरीन ,सोडियम से एक इलेक्ट्रान ग्रहण करता है।

वैद्युत संयोजकता किसे कहते हैं?

वैद्युत संयोजी या आयनिक बंध कब बनते है?

जब एक परमाणु को इलेक्ट्रान त्यागने तथा दूसरे ग्रहण करने की आवश्यकता पड़ती है, तब वैद्युत संयोजी बंध बनाते है। एक परमाणु धन आवेश तथा दूसरा ऋण आवेश होना चाहिए। एक परमाणु धातु तो दूसरा अधातु होना चाहिए।

साधारण भाषा में – जब एक परमाणु में इलेक्ट्रान की अधिक्ता और एक में कमी होती है। तब वैद्युत संयोजी बंध बनाते है।

जैसे – MgO, मैग्निसियम (Mg) का परमाणु क्रमांक 12 होता है। इसके बाह्य कोश में 2 इलेक्ट्रान (सयोजकता 2) होते है। और ऑक्सिन (O) परमाणु का क्रमांक 8 होता है। इसके बाह्य कोश में 6 इलेक्ट्रान होते है। O को अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रान की आवश्यकता होती है। Mg के बाह्य कोश में 2 इलेक्ट्रान होते है। इसलिए Mg स्थाई होने के लिए 2 इलेक्ट्रान O को दे देता है। O के बाह्य कोश में 2 इलेक्ट्रोनो को कमी होने के कारण अपना अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रान Mg से ग्रहण कर लेता है।

वैद्युत संयोजकता किसे कहते हैं?

वैद्युत संयोजी यौगिक के लक्षण

  • आयनिक यौगिक अणुओ से नही बने होते है; ये बिपरीत आयनो के बने होते है।
  • आयनिक यौगिकों के गलनांक ऊँचे होते है क्योकि आयनिक क्रिस्टल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • आयनिक यौगिकों के क्वथनांक ऊंचे होते है क्योकि विपरीत आवेशित आयनो के मध्य आकर्षक बल होता है।
  • आयनिक यौगिक जल तथा अन्य ध्रुवीय विलयन में विलेय होते है तथा अधुवीय विलयक में अविलेय होते है।
  • आयनिक यौगिक जल में घोलने पर मुक्त आयनो में वियोजित हो जाते है क्योकि डाई- इलेक्ट्रिक स्थिरांक बहुत ऊँचा होता है।
  • गलित अवस्था या जलीय विलयन में आयनिक यौगिक विघुत चालक होते है क्योकि आयन मुक्त हो जाते है।
  • वैद्युत संयोजी बंध अधिशात्मक होते है क्युकी वैघृत संयोजी यौगिक की कोई अणु संरचना नहीं होती है।

वैद्युत संयोजी यौगिक जल में क्यों घुल जाते है?

क्योकि वैद्युत संयोजी यौगिकों का डाई – इलेक्ट्रिक स्थिरांक अधिक होता है।

क्या वैद्युत संयोजी यौगिक ध्रुवीय विलय में विलेय होते है?

वैद्युत संयोजी यौगिक ध्रुवीय विलयन में विलेय और अध्रुवी विलयन में अविलेय होते है।

वैद्युत संयोजी यौगिक जल में घुलने पर वैद्युत के चालक क्यों होते है?

वैद्युत संयोजी यौगिकों का डाई इलेक्ट्रिक-स्थिरांक अधिक होने के कारण यह आयनो में टूट जाता है। आयन विधुत के चालक होते है।

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